Sadhana Shahi

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रहस्यमई गांँव (कहानी) प्रतियोगिता हेतु17-Mar-2024

दिनांक- 17,0 3, 2024 दिवस- रविवार प्रदत्त विषय - रहस्यमय गाँव

एक समय था जब रुस्तमपुर गांँव में चहल-पहल, हंँसी- ठिठोली गांँव की शोभा को बढ़ाता था। किंतु अचानक पता नहीं क्या हुआ कि रुस्तमपुर में जिस भी लड़के की शादी हो, उसकी दुल्हन एक सप्ताह के अंदर ही भगवान को प्यारी हो जाए। इस तरह नववधुओं की मौतें गाँव के लिए एक रहस्य बन गई थीं। जो भी नई उम्र के लड़के थे उनका घर बसाने के पहले ही उजड़ जा रहा था। गाँव में चारों तरफ़ अवसाद, निराशा, मायूसी, उदासी अपने पैर पसारने लगी थी। किंतु इस रहस्य का पर्दाफाश कोई भी नहीं कर पा रहा था ऐसा हो क्यों रहा है?। एक-एक करके हर घर में मातम छाने लगा था। देखते ही देखते तीन-चार महीने के अंदर कम से कम 10 घरों में मौतें हो गईं! अब गांँव के लोग बड़े चिंतित हुए। और सब लोग मिलकर गांँव के प्रधान से बोले कि ज़रूर हमारे गांँव पर कोई काली छाया, कोई जादू टोना या फिर किसी देवता, पितृ का प्रकोप है जिस कारण हमारा हँसता- खेलता गांँव श्मशान बनता जा रहा है। किंतु प्रधान गांँव वालों की बात मानने को तैयार नहीं थे। वो कह रहे थे तुम लोग आज के हो करके इन दकियानूसी बातों में विश्वास करते हो?

कुछ नहीं है तुम सब लोग बेवकूफ़ हो। यह सब इत्तेफ़ाक है। जो होना है वही हो रहा है और वो किसी भी पंडित, ज्योतिष को अपने गांँव के बारे में दिखाने को तैयार नहीं हुए।

तीन महीना और बीत गया उन तीन महीनों में भी दो घरों में मौतें हो गईं अब तो गाँव वाले बिल्कुल बौखला गए और ग्राम प्रधान के घर के दरवाज़े पर जाकर धरना दे दिए कि अब तो या तो गांँव की कुंडली किसी जानकार ज्योतिष, पंडित, पुरोहित को दिखाई जाएगी या फिर गाँव की सारी औरतें आपके घर के दरवाज़े पर ही अपनी जान दे देंगी। ग्राम प्रधान बड़े ही दुविधा में पड़ गए और मरता क्या न करता गांँव वालों के जिद्द के आगे उन्हें झुकना पड़ा। वे लोग पास ही में एक बहुत ही प्रसिद्ध मनीषी थे उनके पास गए और अपने गांँव के बारे में बताए। लोगों की बात सुनते ही मनीषी ग्राम प्रधान की तरफ़ देखे, ग्राम प्रधान मनीषी की तरफ़ देखते ही पलकें झुका लिए, जैसे इन सारी बातों के लिये वो ही ज़िम्मेदार हों। मनीषी ने ग्राम प्रधान से पूछा, क्या बात है प्रधान जी, यह सब क्यों हो रहा है? आपको तो पता ही है। बता दीजिए गांँव वालों को, खोल दीजिए गाँव के रहस्य को।

ग्राम प्रधान हकलाते हुए, मुझे----- मुझे ----कैसे पता होगा! मुझे नहीं पता। मनीषी मुस्कुराते हुए बोले, जी प्रधान जी मुझे पता है कि आपको ही पता है। अब आप यह बताइए कि आप बताएंँगे, या मैं बताऊँ।

प्रधान जी ने कहा मुझे नहीं पता अँ-----तब मनीषी ने गांँव वालों को बताया, प्रधान जी के बड़े बेटे की शादी एक विलायत में पढ़ी हुई सभ्य, संस्कारी, सभी गुणों से संपन्न लड़की से हुई थी। लड़की जब ससुराल में आई तो पहली ही रात को उसकी सास ने उसे एक सफ़ेद कपड़ा उसका कुंँऑरापन चेक करने के लिए दिया। चूकि लड़की विलायत में पढ़ी थी इसलिए उसे इन परंपराओं के नाम पर दकियानूसी बातों के बारे में कुछ भी पता नहीं था। अपने सुहागरात की अगली सुबह जब वह उठीं तब सासू मांँ ने चहकते हुए उससे सफ़ेद कपड़ा मांँगा, तो किसी भी प्रकार की कुरीति या किसी कठोर सज़ा से अनभिज्ञ रागिनी ने सासू मांँ को कपड़ा लौटा दिया। लेकिन यह क्या---! सफ़ेद कपड़ा देखते ही सासू मांँ आग बबूला हो गईं पूरे घर को इकट्ठा कीं, यह लड़की कुल्टा है पता नहीं कहांँ अपना मुंँह काला करके आई है और हमारे बेटे के पल्ले मढ़ गई। फिर लड़की के माता-पिता को बुलाया गया और यह कहा गया कि अपनी यह बाजारू बेटी को अपने साथ ले जाएंँ। लड़की कुछ भी समझ नहीं पा रही थी, उसने अपने पति से कहा रमेश यह क्या है? आजकल लड़कियांं साइकिल, बाइक चला रही हैं, खेल- कूद रही हैं, मैं ख़ुद राष्ट्रीय स्तर की धाविका रही हूंँ ऐसे में एक कपड़े पर ख़ून लगा या नहीं लगा यह कैसे किसी लड़की के चरित्र को साबित करता है। पति सब कुछ समझ रहा था लेकिन अपने माता-पिता के सामने उसकी बोलने की हिम्मत नहीं थी। अंततः वह अपने पति धर्म को भूलकर अपने माता-पिता के निर्णय के सामने झुक गया और उसके माता-पिता ने अपनी बहू को उसके मायके जाने का अंतिम फ़ैसला सुना दिया। लड़की ने अपने माता-पिता से बोला मम्मी-पापा आप लोग घर जाइए मैं कल ख़ुद आ जाऊंँगी सिर्फ़ आज की रात मुझे इस घर में रहना है। उसके मम्मी-पापा अपने घर चले गए लड़की अपने कमरे में चली गई उस रात उसका पति कमरे में नहीं आया क्योंकि उसके माता-पिता उसे कुल्टा लड़की के साथ रहने से मना कर दिए थे। लड़की ने रात में ही फाँसी लगाकर अपनी जीवन लीला समाप्त कर दिया और उस लड़की की आत्मा ही प्रत्येक नई दुल्हन को दबोच ले रही है ताकि किसी और दुल्हन के साथ वह सब कुछ ना हो जो उसके साथ हुआ।

यह सब कुछ बताने के बाद मनीषी ने ग्राम प्रधान से पूछा, क्यों प्रधान जी यह सब सच है? प्रधान जी पलकें झुकाए हुए हांँ में गर्दन हिलाए कुछ भी बोल नहीं पा रहे थे। मनीषी के मुंँह से यह बात और ग्राम प्रधान का हामी भरना सुनकर गांँव वाले आग बबूला हो गए और वो सब ग्राम प्रधान के ऊपर हाथ चलाने पर आमादा हो गए। तभी मनीषी ने कहा ,अब पहले ही पाप हो चुका है पाप का खंडन दूसरे पाप से नहीं किया जा सकता, अब आप लोग उस पाप को ख़त्म करने का उपाय सोचिए।

तब गांँव वालों ने पूछा, बताइए गुरुजी हम इस पाप से कैसे मुक्ति पा सकते हैं। यदि ऐसे ही चलता रहा तो एक दिन हमारे गांँव का नामो-निशान ही मिट जाएगा। और हमारा गांँव एक रहस्यमय गांँव बनकर रह जाएगा। तब गांँव वालों के आग्रह पर मनीषी जी ने कहा ,जिस भी लकड़ी की शादी होगी वह पहली ही रात को अपने हाथ से प्रधान जी की बहू, अर्थात् रागिनी का पूजा- पाठ करे ,उसके लिए लाल चुनरी चढ़ाए और फ़िर वह लड़की उसी चुनरी को पहन कर अपने पति के कमरे में जाए। यदि आपके गांँव की हर नई- नवेली दुल्हन ऐसा कर पाती है तब जाकर शायद आप पाप मुक्त हो सकें।अन्यथा और कोई दूसरा उपाय नहीं है।

सभी गांँव वाले अपने-अपने घर को गए और उसके बाद से जिस भी लकड़ी की शादी होती वो बहुएँ पहली ही रात को रागिनीै की पूजा करतीं, उसके लिए लाल चुनरी चढ़ातीं, फि़र उसी चु़ँदरी को पहनकर अपने पति के कमरे में जातीं। तब जाकर इस गांँव से मौत के तांडव का खेल समाप्त हुआ।

सीख- संस्कृति ,सभ्यता और परंपराएं तो ठीक हैं किंतु दकियानूसी बातों को लेकर किसी को प्रताड़ित करना बिल्कुल भी सही नहीं है। समय के साथ-साथ हमें अपनी सोच को़ परिवर्तित करने की आवश्यकता है।

साधना शाही वाराणसी

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7 Comments

Babita patel

30-Mar-2024 09:57 AM

Awesome

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RISHITA

21-Mar-2024 11:39 PM

V nice

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Gunjan Kamal

18-Mar-2024 11:55 PM

बहुत खूब

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